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विजय तिलक

भगवान, ब्रह्मा बन्धु बहुत सारे, भव्य, बेहद सुन्दर सांसारे।

यौवन··हिन्दी

image A Mankot-style Pahari School Painting मृत्युलोक की अजब माया है, यहाँ सांस लेना भी मुहाल है। हर पल एक जंग है जो जीती जा रही है और एक का आगाज़ हो रहा है। जीवन को एक हद्द तक समझने के लिए, आँखें खोल कर, करुणा जगा कर, घर से निकलना ही काफी है। माया अचूक है, जो उसकी फ़ितरत है उससे भगवान के अलावा कोई नहीं बच पाया, माया हर क्षण एक द्वन्दव है, उसे समझना किसी हार से कम नहीं।

भगवान, ब्रह्मा बन्धु बहुत सारे,भव्य, बेहद सुन्दर सांसारे।चित्तचोर, चेतना का धनी,छवि चारु, चंचल मनमोहनी।कृपालु, कल्याणकारी करुणा सागर,करुणा कटक बुझाए भगर।प्रेम पिता, प्रेमशील बनमाली,पावन, पालक सबका हितकारी।मायामय, मोहिनी मोहित,मुक्तिदा, मोक्ष का सूचक मुखि।राम, राजीव रचित सर्ग,रचनाकार, रसविक्रांत सर्वमर्ग।शिवजी, शुभ सुंदर सुरेश्वर,शक्तिशाली, शरणागत वत्सल।सतगुरु, संसार सबका तारक,साकार, सारा सृष्टि संचारक।

ज्ञानदा, ज्ञान सुख का दाता,ज्योति स्वर्गीय, जगत पालक जता।

  • यौवन
विजय तिलक · Youvan Prakashan