आगम
न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम्

शैव दर्शन का सारा साहित्य आगम कहलाता है। शिवमुखोंक्त शस्त्र आगम कहलाते हैं। शिवप्राणित शस्त्र आगम हैं। शिव जी ने माता पार्वती को उपदेश दिए वो शैव तंत्र कहलाता है।
आगम की तीन परिभाषाएं और तीन खंड हैं। आगम के तीन खंड में पहला है ‘आगम’, ‘यामल’ और तीसरा मुख्य तंत्र।
वाराही तंत्र में आगम के छह लक्षण दिए हैं
· सृष्टि का वर्णन – शिव जगत के सृजक हैं, ब्रह्मा नहीं
· प्रलय – शिव तांडव से प्रलय
· देवताओं की आराधना के मंत्र
· मंत्रजाप और कार्यविधियाँ
· षट कर्म की व्याख्या – धौति, बस्ती, नेति, त्राटक, नौली, कपाल भाति
· पहल – कर्मफल
आगम के 6 रूप बना दिए जिनका विस्तार वाराही तंत्र मैं है। इस तंत्र के प्रभाव के विषय में शिव ने पार्वती को महानिर्वाण तंत्र में बताया है। शिव कहते हैं कलि के दोष के कारण से वैदिक मंत्रों की पवित्रता और अपवित्रता को परखनेवाला कोई नहीं मिलेगा और यह भिन्न हो जाएंगे। वैदिक मंत्रों का गलत उच्चारण करने से दोष लगता है। वैदिक मंत्रों के उच्चारण हेतु अनेकों विधियों का विवरण है, उच्चारण के प्रयोग में आने वाले स्वर भी हमारे विद्वानों द्वारा विस्तृत रूप से लिखे हुए हैं। स्वरों में उदत्त, अनुदात्त, स्वरित, प्रचय, कम्प के विभाजन से ये ज्ञान हमें मिलता है। शिव कहते हैं, कलि दोष के कारण वेद मंत्रों की पवित्रता नष्ट हो जाएगी, बहुत कम लोग मिलेंगे जो सही उच्चारण करेंगे। शिव ने कहा है की साधन भी अपवित्र होंगे – अपवित्र सामग्री, गाय के शुद्ध घृत का न मिलना। शिव पार्वती को बताते हैं की दुराचारी लोग वेद मंत्रों का दुरुपयोग करेंगे।
आगम जो शंकर के पूर्व के मुख से निकले वे मोक्ष के तंत्र कहलाये। इन्हे साधन और सिद्धांत तंत्र भी कहते हैं।
उत्तर के मुख से निकले हुए हैं मोहन मंत्र, वशीकरण मंत्र
पश्चिम से अगर तंत्र, ज़हर का नाश करने वाले तंत्र। ज़हर का युक्तियुक्त प्रयोग, इसे रसायनशास्त्र भी कह सकते हैं।
दक्षिण की ओर से उच्चाटन और मरण मंत्र, इन्हे घोर मंत्र भी कहा जाता है।
सभी मंत्रों और आगमों के असर करने के लिए शिव को प्रसन्न करना अतिअनिवार्य है।
शिव कहते हैं कलियुग में वेद मंत्रों से नहीं आगम से लोग प्रभावित होंगे।
शैवागम के दो प्रकार हैं
- शैविक (positive)
कल्याण, सुख प्राप्ति, क्लेश नाश
शैविक आगम 10 हैं
- रौद्रिक (negative)
आपत्ति से बचाव, दैविक आपत्ति से बचाव
रौद्रिक आगम 18 हैं
पिछले लेख में आए आगम शब्द का ये अर्थ हैं। इसके बहुआयम हैं। अगले लेख में प्रयास होगा की मैं वैदिक मंत्रों और स्वरों पर एक लेख दूँ।