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राम नाम सहारे भूमंडल ऊशमीकरण से निजात

राम राम

यौवन··हिन्दी

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मेरे क्रांतिकारी विचार अब निजी समस्याओं से परे हो गए हैं, खैर निजता के लिए क्रांति करने वाले को सब बागी कहते हैं। अब निजता नहीं निजात के लिए क्रांति है, ये क्रांति भी विचारों तक ही होगी और मैं इसी में खुश हूँ। मैं जल्दी-जल्दी भूमंडल ऊशमीकरण से बचने का सुझाव दे देता हूँ वरना कोई और दे देगा।

शिव के बारे में अनेकों कथाएं सुनीं हैं हमने, हम तो उनका अड्रेस भी जानते हैं, आज के समय में किसे नहीं पता शिव कहाँ है। अगर आपको अड्रेस चाहिए तो किसी भी गुरु से ले लें। बड़े-बड़े धर्मगुरु भी अब वहाँ सीधे अपनी पहुँच बताते हैं, सीधे हनुमान और शिव के ऑफिस में अर्जी लगा देते हैं। शिव कैलाशों के वासी? नहीं सिर्फ कैलाशों के नहीं, आप ही बताओ कोई एक जगह कितने ही दिन बिना बोरियत रह सकता है? हाँ ये ठीक है शिव जी पहाड़ों में रहते हैं, क्योंकि नीचे गर्मी बहुत है और पानी कुछ साफ नहीं है। यदि शिव यहाँ नीचे रहने लेगेंगे तो ना ध्यान ठीक से होगा और नर्क में होने की फीलिंग आएगी, खैर तिब्बती बुद्धों के हिसाब से तो शिव जी अब भी नर्क में ही रहते हैं। कुछ दिन पहले बहुतदूरभाष पर उनसे बात हुई तो मैंने पूछा था कि नीचे आना क्यों नहीं हो रहा आजकल, तो उन्होंने यही शिकायत की कि दिल्ली, गुड़गाँव में गाड़ियां बहुत हो गई हैं और इसके नीचे तो गर्मी ही रहती है। सुन कर मेरे हंस देने के बाद उन्होंने बताया की आजकल ध्यान कुछ ज़्यादा कर लेते हैं और उससे निकली ऊर्जा को अवशोषित करने वाले लोग कम हैं। उनका कथन था की पहले कितना ही ध्यान कर लेता था पर सब ऊर्जा सब ज्ञान अवशोषित करने वाले तत्पर रहते थे, परंतु अब तादाद कुछ कम हो गई है। वो सारी ऊर्जा ऊपर रह जाती है और बहुत गर्मी हो जाती है, इसी कारण से ध्यान करने के लिए ट्रैवल भी काफी हो जाता है। जब लंबे समय के लिए ध्यान में बैठना होता है और जब ध्यान में ग्रैविटी का प्रयोग करना होता है तो दक्षिणी ध्रुव या उत्तरी ध्रुव की ओर चला जाता हूँ। इसी कारण से ऊशमीकरण हो रहा है, खैर इसमे उनकी गलती तो मालूम नहीं होती, गलती तो हमारी है।

मेरे अनुमान, अनुभव, और रिसर्च से मैं बस इतना कह सकता हूँ की राम नाम से भूमंडल ऊशमीकरण से निजात पाई जा सकती है। राम नाम लेने से मलिन मन साफ होगा, साफ मन होगा तो कनेक्शन बढ़िया जुड़ेगा, और कनेक्शन बढ़िया जुड़ गया तो ज्ञान और ऊर्जा वायरलेसली घरों तक आ जाएगी और मंदिरों में कम जाना पड़ेगा, ज्ञान आएगा तो शायद समझ में भी इज़ाफ़ा हो, और जो यदि समझ में इज़ाफ़ा हो गया, तो भूमंडल अपने आप ठंडा हो जाएगा।

शीतल चित्त भूमंडल सुरक्षित।