#11

विरोध?

मेरे भीतर का नायक अब जग जीत सफल होने को है

यौवन··हिन्दी

image *The Son of Man by René Magritte * हम अपने जीवन के हर अनुभव को कहीं ना कहीं से जानते ही हैं। हमारे अनुभव, हमारे अतीत से ही जन्म लेते हैं। आजकल वो लोग, जिनके पास सब कुछ है, हर संसाधन है, जिनके लिए जीवन और जीवन की दौड़ परेशानी नही है। वो लोग मुझे अक्सर दिखते हैं उन सब बातों को अपना अतीत मान कर जीते हुए जिन बातों से उनका कोई नाता नहीं है। जैसे: दोफ़तोस्की को पढ़ने के बाद लोग उनके लेखन पर विचार नही करते, उससे कुछ सीखते नहीं हैं, बस यही कहते हैं की उनकी कहानियों में सच है, समाज ऐसा ही है, लोग ऐसे ही होते हैं और मेरा जीवन भी उनके ही किसी किरदार के जीवन की तरह हो गया है। यहाँ ये लोग उस सच की बात करते हैं, जिस सच का शतांश भी उन्हे नही मालूम। मेरा ये कहना इसलिए लाज़मी है क्योंकि, मैंने अमूमन लोगों को कहते सुना है कि “जो ये हमारे पास है ये कुछ साथ नहीं जाएगा, इसका कोई मोल नही है।” पर इन लोगों को कभी मैंने ये कहते नही सुना की जो हमारे पास है उसका हमारे पास होना कितना जरूरी है।

दुनिया में शायद हर इंसान किसी ना किसी इंसान या बात से परेशान रहता है, या कहूँ कि उसे शिकायत होती है। मेरी शिकायत और सवाल ये है कि, “हम किसी अनुभव को पढ़ कर, उसे महसूस* करने के बाद, वहीं क्यों नही छोड़ देते?” हम उसे अपने साथ ले आते हैं, अपने जीवन में उस बीज को रख कर उसकी इतनी देख-भाल करते हैं की आखिर में उस बीज को अंकुरित होना ही पड़ता है। क्यों ना हम कोशिश ही इस बात की करें की ये जीवन इतना आनंदमई है, इसका धन्यवाद करें।

आज के दौर में आदमी जितना सोगवार नज़र आता है उतना शायद पिछले सैकड़ों वर्षों में भी कभी नही हुआ होगा। आपका दिमाग ज़्यादा ना चले और आप मेरी ऊपर लिखी बात को नकारात्मकता की ओर ना ले जाएं इसलिए मै बात देता हूँ की मुझे ये लिखते समय ज्ञात है कि “हर दौर की परेशानी लाज़मी है, हर दौर की कठिनईयां अलग होती हैं।” आजकल अधिकतर परेशानियों का कारण है हमारी विरोध करने की प्रवृत्ति। जैसे ये लेख विरोध में लिखा जा रहा है। मेरा मानना है मनुष्य ज़िंदा रहने के लिए अपने खुशी के पलों को याद करता है, मनुष्य की ऊर्जा ही वहीं से आती है, कठिनाइयों को पार कर जीत की खुशी का खयाल ऊर्जा देता है, जोश से भर देता है। परंतु अगर यही रहस्योद्घाटन और आभास कुछ जल्दी हो जाए तो हमारा नज़रिया बदल सकता है। पर आधुनिक युग के आने से, लोगों का एक दूसरे से अपने अनुभव साझा करना आसान हो गया है, इसका परिणाम ये हुआ कि मनुष्य अपने अनुभव अपने करीबी किसी को नहीं, पर किसी और को बताना बेहतर समझता है। आधुनिकता की वजह से हमारी सभी परेशानियाँ इतनी विस्तृत हो गईं हैं की उनको हल करने के लिए हमे उन परेशानियों का सिरा ही नहीं मिलता। आधुनिकता के आने से हमारी ध्यान आकर्षित करने की हवस इतनी बढ़ गई है कि हम अपनी खुशियों को ही नज़रंदाज़ करने लगे हैं। पहले जितनी ख्याति एक कामयाब, बहुत कामयाब व्यक्ति को मिलती थी, उतनी शोहरत का धनी आज हर सौ में से एक व्यक्ति है। (ये आंकड़ा एक से ज़्यादा भी हो सकता है) फिर भी ये हमारी पसंद है की हम इस बात को नज़रंदाज़ करते हैं और सोगवार रहते हैं। ये सब नॉवेल, सब कहानियाँ, ठीक हैं मगर जीवन में प्रत्यक्ष रूप में खुशी हमारे सामने खड़ी है, बस आँखें खोलने की देर है। आधुनिक युग का हर आदमी दिमागी तौर पर अस्थिर होता जा रहा है।

आज जब ये पल गुजर जाएगा, जब हमे इस पल की याद आएगी ही आएगी, हम इसे भूलेंगे नहीं, और ये हमारे एक नए अनुभव को जन्म देगा। तो क्यों ना हमारी कोशिश रहे कि हम इस पल को सकारात्मक भाव से याद रखें।

प्रभु आपकी हर कोशिश को कामयाब करें।

जग में अनगिन भावों का
कविताएं ही शिखर रहीं है 
जब प्रत्यंचा पर धर्म धरा हो 
कविताएं ही मुखर रहीं है 

कविताओं में आंसू हैं 
कविताओं में प्रीत छुपी है
हम सब के अन्तस में कोई  
कविता, बन कर गीत छुपी है 

मेरी कविता सुन कर मेरी
कविताएं मुस्काती हैं 
मेरी सिहरन कंपन से 
हार खड़ी थर्राती है 

बहते शोणित, रक्तधार से 
कविता कहने वाला हूं 
मैं अश्रूधार में सदा अमर हूं 
सदियां रहने वाला हूं 

मेरे भीतर का नायक अब 
जग जीत सफल होने को है 
मेरी आशाओं से, रौशन 
नयन सजल होने को हैं 

- यौवन

*लेखन का काम है की पाठक तक पहुंचे और उसे विचार करने पर विवश करे। परंतु ये विचार सदा ही नकारात्मक हो ये जरूरी नही हैं।